'देश के रत्नों से उनके नाम कामों से जड़ी,
इस तरह तुमने कभी देखी लिखी बाराखड़ी'
इस तरह तुमने कभी देखी लिखी बाराखड़ी'
रजनीकांत शुक्ल
'क' से कुल दुनिया हमारी जिसमे भारत देश है
'ख' से खेती जिसमे जीवनदान का सन्देश है ।
'ख' से खेती जिसमे जीवनदान का सन्देश है ।
'ग' से गंगा सबसे पहले,
आर्य उतरे थे जहाँ
'घ' से घर की आबरू,
रक्षक हैं जिसके नौजवां,
'च' से राजा चन्द्रगुप्त औ,
'छ' से उसका छत्र है
देश के इतिहास का वो युग,
सुनहरा पत्र है ।
आर्य उतरे थे जहाँ
'घ' से घर की आबरू,
रक्षक हैं जिसके नौजवां,
'च' से राजा चन्द्रगुप्त औ,
'छ' से उसका छत्र है
देश के इतिहास का वो युग,
सुनहरा पत्र है ।
क से कुल दुनिया हमारी जिसमे भारत देश है
ख से खेती जिसमे जीवनदान का सन्देश है ।
ख से खेती जिसमे जीवनदान का सन्देश है ।
'ज' जलालुद्दीन अकबर जिसने,
सौ हीले किये,
हिन्दू मुस्लिम नस्ल और,
मजहब मिलाने के लिए,
'झ' से है झाँसी की रानी,
'ट' से टीपू सूरमा
जिसके जीते जी न सिक्का,
चल सका अंग्रेज़ का,
'ठ' से वो ठाकुर जिसे
टैगोर कहता है जहां
विश्व भर में उसकी रचनाओं से,
है भारत का मान ।
सौ हीले किये,
हिन्दू मुस्लिम नस्ल और,
मजहब मिलाने के लिए,
'झ' से है झाँसी की रानी,
'ट' से टीपू सूरमा
जिसके जीते जी न सिक्का,
चल सका अंग्रेज़ का,
'ठ' से वो ठाकुर जिसे
टैगोर कहता है जहां
विश्व भर में उसकी रचनाओं से,
है भारत का मान ।
'क' से कुल दुनिया हमारी जिसमे भारत देश है
'ख' से खेती जिसमे जीवनदान का सन्देश है ।
'ख' से खेती जिसमे जीवनदान का सन्देश है ।
'ड' से डल कश्मीर की,
जो हर नज़र का नूर है
'ढ' से ढाका जिसकी मलमल,
आज तक मशहूर है ।
'त' से ताज आगरे का,
इक अछूता शाहकार
शाहजहाँ की लाडली,
मुमताज़ बेगम का मजार
जो हर नज़र का नूर है
'ढ' से ढाका जिसकी मलमल,
आज तक मशहूर है ।
'त' से ताज आगरे का,
इक अछूता शाहकार
शाहजहाँ की लाडली,
मुमताज़ बेगम का मजार
'द' से दिल्ली दिल वतन का,
'ध' से धड़कन प्यार की
'न' से नेहरु जिस पे हैं
नज़रें लगी संसार की,
'प' से उसका पंचशील
और 'फ' से उसका सुर्ख फूल
'ब' से बापू जिसको प्यारे ,
थे अहिंसा के उसूल
'भ' भगत सिंह जिसने ललकारा,
विदेशी राज को
चढ़ के फाँसी पर बचाया,
अपनी माँ की लाज को ।
'ध' से धड़कन प्यार की
'न' से नेहरु जिस पे हैं
नज़रें लगी संसार की,
'प' से उसका पंचशील
और 'फ' से उसका सुर्ख फूल
'ब' से बापू जिसको प्यारे ,
थे अहिंसा के उसूल
'भ' भगत सिंह जिसने ललकारा,
विदेशी राज को
चढ़ के फाँसी पर बचाया,
अपनी माँ की लाज को ।
'क' से कुल दुनिया हमारी जिसमे भारत देश है
'ख' से खेती जिसमे जीवनदान का सन्देश है ।
'ख' से खेती जिसमे जीवनदान का सन्देश है ।
'म' से हो मजदूर जिसका,
दौर अब आने को है
'य' से युग सरमायादारी का,
जो मिट जाने को है
'र' से रास्ता प्यार का,
'ल' से लगन इन्साफ की
'व' से ऐसा वायुमंडल,
जिससे बरसे शांति
'श' से शाहों का जमाना,
'स' से समझो जा चुका
'ह' से हम सब से एक हों
वक्त ये फरमा चुका ।
दौर अब आने को है
'य' से युग सरमायादारी का,
जो मिट जाने को है
'र' से रास्ता प्यार का,
'ल' से लगन इन्साफ की
'व' से ऐसा वायुमंडल,
जिससे बरसे शांति
'श' से शाहों का जमाना,
'स' से समझो जा चुका
'ह' से हम सब से एक हों
वक्त ये फरमा चुका ।
'क' से कुल दुनिया हमारी जिसमे भारत देश है
'ख' से खेती जिसमे जीवनदान का सन्देश है ।
'ख' से खेती जिसमे जीवनदान का सन्देश है ।
साहिर
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