Saturday, 12 September 2015

लोकतंत्र आया जंगल में,
नाखुश राजा रानी,
बकरी शेर पिएंगे दोनों,
एक घाट का पानी,
रहकर जल में बैर मगर से,
कैसे निभे बताओ,
सर्व समर्पण तुम्हें,
अगर खाना है हमको खाओ,

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