Saturday, 12 September 2015

"वो इतना कहते ही माँ के,
गले में झूल जाता है,
भला इतवार के दिन भी,
कोई स्कूल जाता है,...
उठें सूरज से पहले हम,
नमस्ते हम करें किसको,
दिसंबर में तो सूरज भी,
निकलना भूल जाता है,
बल्ली सिंह चीमा

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