Saturday, 23 April 2016

पशु ,पक्षी ,पौधे ,जल, वायु,
सब एक दूजे पर निर्भर है,
सारे परिवारी जन अपने,
ये धरती हम सबका घर है,
हो कोई मजदूर बटोही,
अथवा वो कोई अफसर है,
आश्रय पाते सभी जहाँ पर,
ये धरती हम सबका घर है,
दर्द हरें इसके हम सारे,
बिन इसके अब कहां गुजर है,
है हम सबकी जिम्मेदारी,
ये धरती हम सबका घर है,
आओ इसे खुशनुमा बनाएं,
जो भी आता जहां नज़र है,
बेहतर कर सौंपें बच्चों को,
ये धरती हम सबका घर है,
लड़ते हँसते साथ चलेंगे,
कहाँ अकेले कटा सफर है,
एक नाव के सब सवार हम,
ये धरती हम सबका घर है,

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