Saturday, 23 April 2016

घर के दरवाजे पर लटके,
फूलों के गुच्छे,
गर्मी के मौसम में लगते,
हैं कितने अच्छे,
रौनक है घर की मेरे,
ये शान हमारी है,
पानी इन्हें पिलाएं,
अपनी जिम्मेदारी है,
कई फूल खिल गए,
कई हैं खिलने को तैयार,
बेशक हो एक दिन का जीवन,
सदा लुटाते प्यार,
हरी पत्तियों बीच गुलाबी-,
लाल रंग रंगीले,
बाँट रहे खुश्बू सुंदरता,
लगते बड़े सजीले,
समझ नहीं आता जवान ,
हैं बूढ़े या बच्चे,
घर के दरवाजे पर लटके,
फूलों के गुच्छे,
मधूमालती के गुच्छों का,
रूप अनूप निराला,
घर के दरवाजे की शोभा,
को अगणित कर डाला,
रंग भले हल्के हो लेकिन,
हैं बिल्कुल सच्चे,
गर्मी के मौसम में,
लगते हैं कितने अच्छे,

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