Saturday, 23 April 2016

स्वागत नव मेहमान तुम्हारा स्वागत,
तुम आए तो खुश हम सब अभिभावक,
स्वागत नव मेहमान तुम्हारा स्वागत,
नई धरा है गगन नया,
तुमने पहना वसन नया,
वश में न था लेकिन पाया,
तुमने अपना वतन नया,
आशा देता हमें हरेक नवागत,
स्वागत नव मेहमान तुम्हारा स्वागत,
घुलता ज़हर हवाओं में,
जज़्ब है कहर फ़िज़ाओं में,
हवा चल रही कुछ ऐसी,
शामिल सभी गुनाहों में,
कर पाएंगे क्या हम तेरी हिफ़ाजत ?
स्वागत नव मेहमान तुम्हारा स्वागत,
मरे- मरे से जीते हैं,
ग़म खाते दुख पीते हैं,
घोर निराशा के वन में,
लगने लगे पलीते हैं,
लगता पर होता सब नहीं यथावत,
स्वागत नव मेहमान तुम्हारा स्वागत,
हर उलझन सुलझाना तुम,
राह नई दिखलाना तुम,
कोना-कोना रौशन हो,
वह उजियारा लाना तुम,
हर दुश्मन की कहके लाना शामत,
स्वागत नव मेहमान तुम्हारा स्वागत,
तुम आए तो खुश हम सब अभिभावक,
स्वागत नव मेहमान तुम्हारा स्वागत,

No comments: