Friday, 8 July 2016

आसमान में छाए बादल,
जल भर भर कर लाए बादल,
लगता अब ये नहीं रुकेंगे,
कितना ऊपर और झुकेंगे,
ताल तलैया सब प्यासे थे,
आना ही था चौमासे थे,
धूल भरे थे पेड,नहाएं,
बच्चे घर से बाहर आएं,
ठंडी हवा बदन को भाती,
तन और मन दोनों सिहराती,
तबियत खुश कर जाए बादल,
आसमान में छाए बादल,

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