Wednesday, 24 July 2013

झील का किनारा हो,
शान्त शमा सारा हो,
आसमाँ पे तारों के संग,
चाँद आवारा हो,

झील में गिरे पत्थर,
याद ऐसी दिल में आए,
कुहुक उठे कोयल लगे,
तुमने पुकारा हो,

जिन्दगी की तल्खियों ने,
 हमें कर दिया उदास,
दिल ये चाहे अब तो,
 तेरी बाँहों का सहारा हो,

जिन्दगी तो यूँ भी
एक ग़म के सिवा कुछ ना थी,
मिले प्यार का तेरे जो ग़म,
वो ग़म भी हमें प्यारा हो,

छोटी-छोटी इन आँखों में
 ख्वाब हैं बड़े-बड़े,
होंगे सच जो ग़र तेरा,
जरा सा इशारा हो,

ये खयाल दिल को मेरे,
 हर घड़ी सताता है,
बिजलियाँ गिरें जिस पर
वो न दिल हमारा हो,

जिन्दगी तो जिन्दगी

 मौत से भी भिड जाऊँ ,
फक्र करूँ जीने में ,

 तू जो ग़र हमारा हो,

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