ओ प्यारे दिलवर,चल आसमाँ पर,
हम इक बनाएंगे आशियाना,
न बिजलियों का,हो डर जहाँ पर,
न देख पाए हमें जमाना,
है प्यार जिस दिल में,उसका दुश्मन,
है ये जमाना, यक़ीन कर लो,
नहीं ये मुमकिन जमाना बदले,
यही मुनासिब,जमीन बदलो,
सुकरात ईसा जरथुष्ट गाँधी,
की एक जैसी, ही है कहानी,
वफा के बदले में बेवफाई,
है रीत सदियों, की ये पुरानी,
चल उस जहाँ में,कि जिसमें हरसू,
मोहब्बतों का, है बोलबाला,
नहीं है नफरत की रस्म कोई,
न कत्लो-खूँ का रिवाज़ काला,
पनाह पाए जहाँ मोहब्बत,
औ नफरतों का,उठे जनाज़ा,
भटक चुका है, बहुत ये दिल अब,
कसम है तुझको, करीब आ जा,
कहाँ पे हो खो गए, कहो क्या,
पसंद आया, मेरा कहा ना,
ओ प्यारे दिलवर,चल आसमाँ पर,
हम इक बनाएंगे आशियाना...
हम इक बनाएंगे आशियाना,
न बिजलियों का,हो डर जहाँ पर,
न देख पाए हमें जमाना,
है प्यार जिस दिल में,उसका दुश्मन,
है ये जमाना, यक़ीन कर लो,
नहीं ये मुमकिन जमाना बदले,
यही मुनासिब,जमीन बदलो,
सुकरात ईसा जरथुष्ट गाँधी,
की एक जैसी, ही है कहानी,
वफा के बदले में बेवफाई,
है रीत सदियों, की ये पुरानी,
चल उस जहाँ में,कि जिसमें हरसू,
मोहब्बतों का, है बोलबाला,
नहीं है नफरत की रस्म कोई,
न कत्लो-खूँ का रिवाज़ काला,
पनाह पाए जहाँ मोहब्बत,
औ नफरतों का,उठे जनाज़ा,
भटक चुका है, बहुत ये दिल अब,
कसम है तुझको, करीब आ जा,
कहाँ पे हो खो गए, कहो क्या,
पसंद आया, मेरा कहा ना,
ओ प्यारे दिलवर,चल आसमाँ पर,
हम इक बनाएंगे आशियाना...
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