Wednesday, 24 July 2013


नई पीढ़ी के प्रति
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हमारी आज की हर कामना,तुम पर निछावर है,
हमारी प्रार्थनाओं का पुकारा कल,तुम्हीं तो हो,

तुम्हारी दृष्टि से जुड़कर हमारी दृष्टि कहती है,
हमारी स्वप्नदर्शी आँख का काजल,तुम्हीं तो हो,

हमारी इन्द्रधनुषी कल्पनाओं में फलो-फूलो,
समय के श्याम-पट पर,ज्योति के अक्षर,सजाना तुम,

हमारे चोट खाए पाँव की, हर टीस कहती है ,
हमारी हर पराजय को विजय-गाथा,बनाना तुम,

-- शिवओम अम्बर

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