यह भी कितना अजीब है,
कि उगाने वाले भूखे रहते है,
और अनाज पचा जाते है,
चूहे और बिस्तरों पर पड़े लोग,
बुनकर फटे चीथड़ों मे रहते हैं,
और अच्छे-अच्छे कपड़े पहनती हैं,
प्लास्टिक की मूर्तियाँ...(गोरख पाण्डे)
कि उगाने वाले भूखे रहते है,
और अनाज पचा जाते है,
चूहे और बिस्तरों पर पड़े लोग,
बुनकर फटे चीथड़ों मे रहते हैं,
और अच्छे-अच्छे कपड़े पहनती हैं,
प्लास्टिक की मूर्तियाँ...(गोरख पाण्डे)
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