दिल कहे रुक जा रे रुक जा,
यहीं पे कहीं,
जो बात,जो बात इस जगह है,
वो कहीं पे नहीं,
दिल कहे रुक जा रे रुक जा,
यहीं पे कहीं,
जो बात,जो बात इस जगह है,
वो कहीं पे नहीं,
दिल कहे रुक जा रे रुक जा,
पर्वत ऊपर खिड़की खोले,
झाँके सुन्दर भोर,
चले पवन सुहानी,
नदियों के ये राग रसीले,
झरनों का ये शोर,
बहे झर-झर पानी,
मद-भरा मद-भरा समां,
वन धुला-धुला,
हर कली रस पली यहाँ,
रस घुला-घुला,
तो दिल कहे रुक जा रे रुक जा,
यहीं पे कहीं,
जो बात जो बात इस जगह है
वो कहीं पे नहीं,
झाँके सुन्दर भोर,
चले पवन सुहानी,
नदियों के ये राग रसीले,
झरनों का ये शोर,
बहे झर-झर पानी,
मद-भरा मद-भरा समां,
वन धुला-धुला,
हर कली रस पली यहाँ,
रस घुला-घुला,
तो दिल कहे रुक जा रे रुक जा,
यहीं पे कहीं,
जो बात जो बात इस जगह है
वो कहीं पे नहीं,
नीली-नीली झील में झलके,
नील गगन का रूप,
बहें रंग के धारे,
ऊँचे-ऊँचे पेंड़ घनेरे,
छनती जिनसे धूप,
खड़े बाँह पसारे,
चम्पई-चम्पई फिज़ा ,
दिन खिला-खिला,
डाली-डाली चिड़ियों की सदा,
सुर मिला-मिला,
तो दिल कहे रुक जा रे रुक जा,
यहीं पे कहीं,
जो बात जो बात इस जगह है
कहीं पर नहीं,
नील गगन का रूप,
बहें रंग के धारे,
ऊँचे-ऊँचे पेंड़ घनेरे,
छनती जिनसे धूप,
खड़े बाँह पसारे,
चम्पई-चम्पई फिज़ा ,
दिन खिला-खिला,
डाली-डाली चिड़ियों की सदा,
सुर मिला-मिला,
तो दिल कहे रुक जा रे रुक जा,
यहीं पे कहीं,
जो बात जो बात इस जगह है
कहीं पर नहीं,
परियों के ये जमघट जिनके,
फूलों जैसे गाल,
सभी शोख हठीली,
इनमें है वो अल्हड़,
जिसकी हिरनी जैसी चाल,
बड़ी छैल-छबीली,
मनचली-मनचली अदा,
छवि जवाँ-जवाँ,
हर घड़ी चढ़ रहा नशा,
सुध रही कहाँ,
तो दिल कहे रुक जा रे रुक जा,
यहीं पे कहीं,
जो बात जो बात इस जगह है
कहीं पर नहीं,
फूलों जैसे गाल,
सभी शोख हठीली,
इनमें है वो अल्हड़,
जिसकी हिरनी जैसी चाल,
बड़ी छैल-छबीली,
मनचली-मनचली अदा,
छवि जवाँ-जवाँ,
हर घड़ी चढ़ रहा नशा,
सुध रही कहाँ,
तो दिल कहे रुक जा रे रुक जा,
यहीं पे कहीं,
जो बात जो बात इस जगह है
कहीं पर नहीं,
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