करता हूँ मैं सलाम मादरी जुबान को,
जिसमें पुकारा सबसे पहले माँ के नाम को,
बहती है जिसमें दरिया की मानिंद मेरी सोच,
खुशदिल बनाया जिसने मेरी सुबह शाम को,
जिसमें पुकारा सबसे पहले माँ के नाम को,
बहती है जिसमें दरिया की मानिंद मेरी सोच,
खुशदिल बनाया जिसने मेरी सुबह शाम को,
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