Tuesday, 7 February 2017

अब न कर विलम्ब अम्ब,
कंठ में विराज आज,
साज ले सितार,
तार-तार झनकार दे,
प्यार दे पुकार पर,
गुहार पर सँभार स्वर,
जीभ पर सजीव,
शब्द-शब्द रस धार दे,
भाव दे प्रभाव दे,
स्वभाव दे कि काव्य भव्य,
भावना भरी हुई,
विभावना विहार दे,
मातु मैं कहूँ तो सत्य,
सत्य में शिवत्व तत्व,
तत्व में सदैव अभय,
सुंदरतम साज दे,
अब न कर विलंब अम्ब,
कंठ में विराज आज,
साज ले सितार,
तार-तार झनकार दे,
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या कुन्देन्दुतुषारहारधवला
या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा
या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकर
प्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती
भगवती निःशेषजाड्यापहा।।
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माँ तुम्हीं कहो कि,
किस तरह तुम्हें पुकार लें,
प्रत्यक्ष लक्ष के समक्ष,
आरती उतार लें,
तेरे पाद पंकजों का,
पंकजों के भी रजों का,
कोटि-कोटि बार-बार,
प्रेम से पुकार लें,
तुम्हारे ज्ञान पुञ्ज को,
विवेक के निकुञ्ज को
दया करो हे देवि हम,
कर तो नमस्कार लें,
माँ तुम्हीं कहो कि....

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