कल पुस्तक मेले में हम थे,
पुस्तक थीं और बच्चे थे,
पुस्तक थीं और बच्चे थे,
दोस्त दोस्तों के संग संग थे,
वे क्षण कितने अच्छे थे,
वे क्षण कितने अच्छे थे,
वादा है यह अपना खुद से,
आगे भी हम संग रहें,
आगे भी हम संग रहें,
मजे करें, बातें आपस में,
मिलें जुलें ना बंद रहें,
मिलें जुलें ना बंद रहें,
पढने का आनंद भला,
ना पढने वाले क्या जाने,
ना पढने वाले क्या जाने,
जिनका दिल खुश हुआ,
वही तो मोल इन्ही का पहचाने,
वही तो मोल इन्ही का पहचाने,
No comments:
Post a Comment