Tuesday, 11 October 2016

गदाधरराय नवीन
(संवत-1776-1836)
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पवित्र कुरान का कविता में अनुवाद किया,
दिल्ली दरबार में लार्ड हार्डिग्ज को कविता सुनाई।
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डमरु विशाल कर,नाचत विनोद युत,
लाल -लाल नैन काहू ध्यान में सुलीन हैं,
अति विषयारे कारे-कारे अहि तीन धारे,
झुकि-झुकि झूमि-झूमि डोलत गलीन हैं,
विमल विचित्र गंगधार है जटान मध्य,
माथे पै विराजत मयंक समीचीन है,
एहो ब्रजरानी ब्रजराज को दिखावो आनि,
ब्रज में सुआयों आज जटिल नवीन है,
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जाके रूपरेख न अनिच्छ अद्वतीय अज,
श्रुति स्मृति हु नेति-नेति करि गावती,
अच्युत अनंत अविकारी अविनाशी ताहि, 
देखि अनमनो सब देवन मनावती,
तारी को लगैया त्रिपुरारी हू न पावैं ताहि,
दै- दै करतारी वै नवीन दुलरावती,
जगत अपार की रमैया शेष-शय्या ताकी,
लेकर बलैया मैया पालन झुलावती,👍

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