Tuesday, 11 October 2016

लालमण पाण्डे,प्रमोद
(संवत1911-1960)
रचना--प्रमोद प्रकाश)
प्रकाशित-1966
मन तौ उरझो उनपै सजनी ,
तनु तीर तुम्हारे भले हम लाईं,
हमरी रसना की कहा गति है,
जो कहै उनकी छवि की परछाईं,
चलि देखौ प्रमोद कहे न बने,
सुधि भूलि हौ देखत ही उन धाई,
जनु ब्रह्म सिंगार दुऔ अवतार,
धरे नर देह फिरै यहि ठाई,

No comments: