Tuesday, 11 October 2016


रामनारायण जी द्विवेदी रमेश 
(1932-1992 वि.)
विलेलेले
केतिक कराल कलिकाल की कठोर कला,
काम क्रोध कपट कुकर्म कुटिलाई है,
कहै कहा कोऊ कछु करनी कुलीनन की,
करत कुकर्म कहै कर्म ही कराई है,
कोविद रमेश कहूँ किंचित कुशल कैसी,
कामनी कनक कोटि कामना कराई है,
काटिए कलेश कारुणीक कमला के कंत,
करौगे कृपा तौ कहौ कौन कठिनाई है,
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अरुण अनार ऐसी एड़ी अवलोकत ही,
ललकतु नीकी भाँति पावत अनन्द है,
जगमग ज्योति नख-नख पै नखत बृंद,
कोटिचन्द्र वारौं शोभा ललित अमंद की,
पगतल पावन प्रभाव प्रभु ताके पुन्ज,
प्रात के प्रभाकर ते लालिमा दुचन्द हैं,
पद अरविन्द पै रमेश रामचन्द्रजू के,
मन मतवारो मेरो मंजुल मयन्द है,
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जनकसुता के पति ताके जिन ताके पति,
सविताके कुल के पताके प्रभुता के हैं,
हरन धरा के भार कृपा के अगार विभु
वीर विरदैत बाँके विदित सदा के है,
धन्य ध्यान जाके परि पाके मुनि वृन्द औ 
अनन्द मद छाके जाके पति गिरजा के हैं,
पूरण कला के कमला के कंत हैं रमेश, 
तारन शिला के ये कुमार कौसला के हैं,
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