Tuesday, 11 October 2016


रामनारायण द्विवेदी रमेश
(1932-1992 विक्रमी)
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आलस त्यागि करौ पुरुषारथ,
ताते यथारत काज फुरैंगे,
उद्यम और उपाय करौ
तब आपुहि देश के दुख टरैगे,
आकरी चाकरी में न चले
इमि दास बने नहि पेट भरैंगे,
भारत भूमि के भाग जगैंगे,
रमेश जू वे दिन फेर फिरैंगे,
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आरत भारत गारत ह्वै रह्यो,
जाने कहा दिन खोटे करैंगे,
काल के गाल के ग्रास भये,
बहु देखे अकाल में केते मरेंगे,
कौलौं रमेश कलेश में देश के वासी
अंदेश के पाले परैंगे,
ह्वैहै कहा अब हे मेरे राम
कहौ कब वे दिन फेरि फिरैंगे,
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