जग में कोई चीज भी,
कब होती बेकार,
कब होती बेकार,
दृष्टि चाहिए दे सकें,
हम उसको आकार,
हम उसको आकार,
हम उसको आकार,
सृजन के विचारों से,
सृजन के विचारों से,
बना टोकरीं लीं ये ,
रद्दी अखबारों से,
रद्दी अखबारों से,
सोच सही जो,
नहीं कोई कठिनाई मग में,
नहीं कोई कठिनाई मग में,
कचरा भी कर सके
उजाला, सारे जग में,
उजाला, सारे जग में,
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