सुनते थे हम शहर में, कोई शोर उठा है,
घर अपना ही जला था नहीं कुछ खबर हुई,
वो डूबती तमन्ना हाय तड़पती उम्मीद,
तेरी रहगुजर को देख के पत्थर नज़र हुई,
ख़्वाहिश थी बरस जाय जरा झूम के पानी,
सैलाब वो आया कि जिन्दगी उजड़ गई,
सुनते थे कि खुश्बू के चमन हैं कई यहाँ,
सहरा ही नज़र आया जहाँ तक नज़र गई,
मायूसियों के साये में डूबे कुछ इस तरह,
तफ़रीक न कर पाया दिल कब शब सहर हुई,
दिल में बना रखी थी इक तस्वीर जो हमने,
जब रूबरू हुए तो, नज़र ही बदल गईमंज़ूर नहीं दिल को तेरे फैसले हुए,
कहते ये वरना हम भी कि किस्मत सँवर गई,
घर अपना ही जला था नहीं कुछ खबर हुई,
वो डूबती तमन्ना हाय तड़पती उम्मीद,
तेरी रहगुजर को देख के पत्थर नज़र हुई,
ख़्वाहिश थी बरस जाय जरा झूम के पानी,
सैलाब वो आया कि जिन्दगी उजड़ गई,
सुनते थे कि खुश्बू के चमन हैं कई यहाँ,
सहरा ही नज़र आया जहाँ तक नज़र गई,
मायूसियों के साये में डूबे कुछ इस तरह,
तफ़रीक न कर पाया दिल कब शब सहर हुई,
दिल में बना रखी थी इक तस्वीर जो हमने,
जब रूबरू हुए तो, नज़र ही बदल गईमंज़ूर नहीं दिल को तेरे फैसले हुए,
कहते ये वरना हम भी कि किस्मत सँवर गई,
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