Saturday, 8 June 2013

रात भर का है मेहमां अंधेरा,किसके रोके रुका है सवेरा,

रात जितनी ही संगीन होगी,सुबह उतनी ही रंगीन होगी,
ग़म न कर ग़र है बादल घनेरा,....

लब पे शिकवा न ला अश्क पी ले,जिस तरह भी हो कुछ देर जी ले,
अब उखड़ने को है ग़म का डेरा,...

यूँ ही दुनिया में आकर न जाना,सिर्फ आँसू बहाकर न जाना,
मुस्कराहट पे भी हक़ है तेरा,...

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