आदमी को जीना है,
ज़हर हो कि अमृत हो मुस्करा के पीना है,
धूप भी है छाँव भी है जिन्दगी की राहों में,
जितने दुख है जितने सुख है सबको ले ले बांहों में,
ग़म उन्ही को घेरता है ग़म से जो घबराए हैं,
क्या बुरे दिन क्या भले दिन,सब गुजरते साये हैं,
मैंने माना इक अनोखा दर्द तेरे दिल में है,
वह खुशी क्यों खो रहा है,जो खुशी महफ़िल में है,
ज़हर हो कि अमृत हो मुस्करा के पीना है,
धूप भी है छाँव भी है जिन्दगी की राहों में,
जितने दुख है जितने सुख है सबको ले ले बांहों में,
ग़म उन्ही को घेरता है ग़म से जो घबराए हैं,
क्या बुरे दिन क्या भले दिन,सब गुजरते साये हैं,
मैंने माना इक अनोखा दर्द तेरे दिल में है,
वह खुशी क्यों खो रहा है,जो खुशी महफ़िल में है,
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