Saturday, 8 June 2013

मैंने जो गीत तेरे प्यार की खातिर लिक्खे,
आज उन गीतों को बाज़ार में ले आया हूँ,

आज दूकान पर नीलाम उठेगा उनका,
तूने जिन गीतों पे रक्खी थी मोहब्बत की असास(नींव),
आज चाँदी के तराजू में तुलेगी हर चीज,
मेरे अफ़़कार(रचनाएं),मेरी शायरी, मेरे अहसास,

जो तेरी जात से मंसूब थे,उन गीतों को,
मुफ़लिसी जिन्स बनाने पे उतर आई है,
भूक तेरे रुखे-रंगी के फसानों के एवज़,
चन्द अशिया-ए-जरुरत की तमन्नाई है,

देख इस कार-गहे-मेहनतो-सरमाया में,
मेरे नग़्मे भी मेरे पास नहीं रह सकते,
तेरे जल्वे किसी जरदार(पूंजीपति)की मीरास सही,
तेरे ख़ाके(शब्द चित्र)भी मेरे पास सकते,

आज इन गीतों को बाज़ार में ले आया हूँ,
मैंने जो गीत तेरे प्यार की खातिर लिक्खे, (साहिर)

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