Saturday, 8 June 2013

ये दुनियाँ दोरंगी है---
एक तरफ से रेशम ओढ़े,एक तरफ से नंगी है,

एक तरफ अंधी दौलत की, पागल ऐश परस्ती है,
एक तरफ जिस्मों की कीमत रोटी से भी सस्ती है,
एक तरफ है सोनागाछी,एक तरफ चौरंगी है,..ये दुनिया दोरंगी है,

आधे तन पर नूर बरसता,आधे तन पर चीरे,
आधे तन पर कोढ़ के धब्बे,आधे तन पर हीरे,
आधे घर में खुशहाली है,आधे घर में तंगी है,...ये दुनिया दो रंगी है,

माथे ऊपर मुकुट सजाए,सर पर ढ़ोए गंदा,
दाँएं हाथ से भिक्षा माँगे बाँएं से दे चन्दा,
एक तरफ भंडार चलाए,एक तरफ भिखमंगी है,...ये दुनिया दो रंगी है,

इक संगम पर लानी होगी,सुख और दुख की धारा,
नए सिरे से करना होगा,दौलत का बँटवारा,
जब तक ऊँच और नीच है बाकी हर सूरत बेढ़ंगी है,...ये दुनिया दो रंगी है,
(साहिर)

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