जहाँ सच न चले, वहाँ झूट सही,
जहाँ हक़़ न मिले, वहाँ लूट सही,
यहाँ चोर हैं सब कोई साध नहीं,
सुख ढ़ूँढ़ ले, सुख अपराध नहीं,
प्यारे तू ग़म न कर,क्योंकि-
जिन्दगी,हँसने गाने के लिए है,
इसे खोना नहीं,खो के रोना नहीं,
तेरे गिरने मे भी तेरी हार नहीं,
कि तू आदमी है अवतार नहीं,
जो हो देश वो भेष बना प्यारे,
चले जैसे भी काम चला प्यारे,
प्यारे तू ग़म न कर,क्योंकि-
जिन्दगी हँसने गाने के लिए है
पल दो पल,इसे खोना नहीं....(साहिर)
जहाँ हक़़ न मिले, वहाँ लूट सही,
यहाँ चोर हैं सब कोई साध नहीं,
सुख ढ़ूँढ़ ले, सुख अपराध नहीं,
प्यारे तू ग़म न कर,क्योंकि-
जिन्दगी,हँसने गाने के लिए है,
इसे खोना नहीं,खो के रोना नहीं,
तेरे गिरने मे भी तेरी हार नहीं,
कि तू आदमी है अवतार नहीं,
जो हो देश वो भेष बना प्यारे,
चले जैसे भी काम चला प्यारे,
प्यारे तू ग़म न कर,क्योंकि-
जिन्दगी हँसने गाने के लिए है
पल दो पल,इसे खोना नहीं....(साहिर)
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