आओ बादल, आओ बादल,
अब तो जल बरसाओ बादल,
चिप-चिप हुआ पसीने से तन,
लगता नहीं, कहीं भी ये मन,
धरती मांग रही है पानी,
इसकी चूनर फिर हो धानी,
जलता है हम सबका आँगन,
आकर अब बरसा दो सावन,
ताल-तलैया सब प्यासे है,
आने वाले चौमासे है,
जी भर-भर कर खूब नहाएं,
कागज़ की नावें तैराएं,
अब ना अधिक सताओ बादल,
अब तो जल बरसाओ बादल,
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