...आँच देने लगा कदमों तले ये बर्फ का फर्श,
आज जाना कि मुहब्बत में है गरमी कितनी,
संगमरमर की तरह सख्त, बदन में तेरे,आ गई है, मेरे छू लेने से नरमी कितनी,...(साहिर)
आज जाना कि मुहब्बत में है गरमी कितनी,
संगमरमर की तरह सख्त, बदन में तेरे,आ गई है, मेरे छू लेने से नरमी कितनी,...(साहिर)
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