सुन ऐ दिल दुनिया से तेरी, आशनाई देख ली,
सिर्फ रुसवाई ही तेरे हाथ आई , देख ली,
अब से पहले दिल ने भी कुछ ख्बाव पाले थे, मगर,
नज़रों के आगे हक़ीकत आज आई, देख ली,
हाथ लेकर हम वफा को, दर-ब-दर घूमा किए,
हर कदम पर भरम टूटा, बेवफाई देख ली,
हर दुकां की चमक ने था,मुझको अपनी ओर खींचा,
वर्क चाँदी में, वो गोबर की मिठाई देख ली,
मैंने तो हर कदम पर,तुझको बताया था यही,
इस जगह गिरतों को कोई भी उठाता है नहीं,
दौर है रुसवाइयों का, तू ये माना ही नहीं,
पर लगी ठोकर खुली आंखें, तो दुनिया देख ली,
तेरी हर मनचाही, लोगों ने कुचल कर फेंक दी,
सिर्फ रुसवाई ही तेरे हाथ आई, देख ली,
भूलकर समझा तू हीरा,हर चमकता सा वो पत्थर,
सारी समझाई हुई बातें गुमी, नज़रें गईं फिर,
और फिर अपने बनाए जाल में तू, खुद गया घिर,
चाक दामन हो गया, करके भलाई देख ली,
हाथ तेरे सिर्फ रुसवाई ही आई, देख ली,
जिसकी किस्मत में सवेरा है नहीं, वो रात आई,
हर तरफ ग़म की घटा है,राह ना पड़ती दिखाई,
फासले मंज़िल के आकर पास फिर,गुम हो रहे हैं,
राह के रहबर भी अब सब,हर कदम पर खो रहे हैं,
हर एक शय से इस जहाँ में चोट खाई, देख ली,
आँख के आगे हक़ीकत आज आई, देख ली,
सुन ऐ दिल दुनिया से तेरी, आशनाई देख ली, (एक पुरानी रचना)
सिर्फ रुसवाई ही तेरे हाथ आई , देख ली,
अब से पहले दिल ने भी कुछ ख्बाव पाले थे, मगर,
नज़रों के आगे हक़ीकत आज आई, देख ली,
हाथ लेकर हम वफा को, दर-ब-दर घूमा किए,
हर कदम पर भरम टूटा, बेवफाई देख ली,
हर दुकां की चमक ने था,मुझको अपनी ओर खींचा,
वर्क चाँदी में, वो गोबर की मिठाई देख ली,
मैंने तो हर कदम पर,तुझको बताया था यही,
इस जगह गिरतों को कोई भी उठाता है नहीं,
दौर है रुसवाइयों का, तू ये माना ही नहीं,
पर लगी ठोकर खुली आंखें, तो दुनिया देख ली,
तेरी हर मनचाही, लोगों ने कुचल कर फेंक दी,
सिर्फ रुसवाई ही तेरे हाथ आई, देख ली,
भूलकर समझा तू हीरा,हर चमकता सा वो पत्थर,
सारी समझाई हुई बातें गुमी, नज़रें गईं फिर,
और फिर अपने बनाए जाल में तू, खुद गया घिर,
चाक दामन हो गया, करके भलाई देख ली,
हाथ तेरे सिर्फ रुसवाई ही आई, देख ली,
जिसकी किस्मत में सवेरा है नहीं, वो रात आई,
हर तरफ ग़म की घटा है,राह ना पड़ती दिखाई,
फासले मंज़िल के आकर पास फिर,गुम हो रहे हैं,
राह के रहबर भी अब सब,हर कदम पर खो रहे हैं,
हर एक शय से इस जहाँ में चोट खाई, देख ली,
आँख के आगे हक़ीकत आज आई, देख ली,
सुन ऐ दिल दुनिया से तेरी, आशनाई देख ली, (एक पुरानी रचना)
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