Thursday, 15 September 2016

राजू का सपना

आज शनिवार था। शाम के पाँच बजते ही राजू बरगद के पेड़ के नीचे पहुँच गया। उसके दोस्त सलीम, स्टेला और नंदिनी वहाँ उसका इंतजार कर रहे थे।
राजू के आते ही सबने मिलकर उसे घेर लिया।
राजू ने भी सबका मन देखकर बिना किसी भूमिका के कहना शुरू कर दिया।
  ‘दोस्तो, इस बार जब मेरी आँख लगी तो मैंने खुद को एक सुंदर बगीचे में पाया। पुराने समय के महात्मा के आश्रम जैसा था वह बगीचा। अभी यह सोच ही रहा था कि ये मैं कहाँ आ गया कि तभी मुझे एक मीठी सी आवाज सुनाई दी -‘अरे राजू तुम यहाँ कैसे ? सब ठीक तो है ? मैंने अपने चारों तरफ नजर घुमाकर देखा तो मुझे अपने आसपास कोई नहीं दिखाई दिया। मैं हैरान था कि आखिर मुझे ये बुला कौन रहा है।
वही आवाज फिर सुनाई दी, -‘तुम्हारे बाकी सब दोस्त कैसे हैं’ ?
मैं जब हैरान हुआ तो वही आवाज फिर से आई -‘परेशान क्यों हो राजू, देखो मैं इधर हूँ, पेड़ की डाल पर’
मैंने जो ऊपर सिर करके पेड़ की डाल की ओर देखा तो वहाँ एक हरे रंग का तोता बैठा था।
तभी एक नन्हा लंगूर दौड़ता हुआ वहाँ आया और उसने पीछे से मेरे कपड़ों को पकड़ कर अपनी ओर खींचा और मुझे एकदम से धक्का दे दिया। अचानक हुए हमले से मैं लड़खड़ा गया।
अरे अरे, मीकू यह क्या कर रहे हो ? - मिट्ठू ने जोर से चिल्लाते हुए कहा।
‘मुझे मत रोको मिðू भइया,मैं इन्हें मारूँगा। इन लोगों ने मेरे मम्मी पापा को कैद करके रखा हुआ है।’ - मीकू गुस्से से चिल्लाया।
‘नहीं नहीं मीकू तुम्हें गलतफहमी हुई है। राजू ऐसा लड़का नहीं है।
 सभी इंसान एक जैसे नहीं होते।’ - मिðू ने मीकू को समझाते हुए कहा।
‘नहीं नहीं मुझे तो सब एक से लगते हैं। मैं जहाँ भी जाता हूँ। ये सारे मुझे चिढ़ाते हैं,पत्थर मारते हैं। आज जब मेरा बदला लेने का मौका आया तो मिट्ठू भैया तुम मुझे रोक रहे हो। यह ठीक बात नहीं है।’- मीकू ने मिट्ठू की ओर देखते हुए गुस्से से कहा।
‘देखो मीकू मैं अक्सर शहर की ओर जाता रहता हूँ। राजू और उसके दोस्तों को मैं जानता हूँ। ये लोग बेसहारा पशु और पक्षियों की मदद करते रहते हैं। कभी किसी बेजुबान जानवर को नहीं सताते बल्कि जो ऐसा करते हैं उन्हें रोकते भी हैं।
‘अच्छा ऐसा क्या ?’ - मीकू ने चैंकते हुए कहा।
लेकिन मीकू के मम्मी पापा को किसने कैद करके रखा है और कहाँ? - मैंने मिट्ठू से पूछा।
केओ मोर ने कहा - ‘मैं बताता हूँ, दरअसल पास में ही आमों का एक बहुत खूबसूरत बाग है। जब आम का मौसम आता तो आमों के बौर की खुश्बू सबको पागल बना देती। जैसे ही उसमें आम आना शुरू होते, बंदरों का झुंड उस बाग में आकर उत्पात करने लगता, वे सारा बाग उजाड़कर तहस-नहस कर देते। बाग का मालिक और रखवाले सिर्फ हाथ मलकर देखते रहते। इतने सारे बंदरों की फौज के सामने वे असहाय हो जाते।
जब सब तरह से उपाय कर वे हार गए तो वे उन बंदरों से बचने के लिए इस मीकू लंगूर के मम्मी पापा को लेकर आए। अब इनके मम्मी पापा के डर से एक भी बंदर वहाँ नहीं फटकता। हम सब अब बाग में जाते हैं तो खुश हो जी भर कर नाचते हैं।’
मैंने कहा - ‘अरे यह तो बडी मजेदार बात तुमने बताई केओ भाई। मीकू के मम्मी पापा ने तो बड़ा ही अच्छा काम किया। क्या बाग के रखवाले मीकू के मम्मी पापा को सताते हैं?’
‘नहीं वे तो बड़े प्यार से रखते हैं। हमें तो खाने की खोज में इधर - उधर भटकना पड़ता है परंतु इसे और इसके मम्मी पापा को तो वहीं पर एक से एक अच्छी चीजें खाने को मिलती हैं।’-मिट्ठू ने बीच में बोलते हुए कहा।
‘तो फिर, मीकू की नाराजगी ?’ - मैंने हैरान होकर प्रश्न पूछा।
‘बस, जब वे मीकू के पापा को घूमने के लिए खुला छोड़ते तो उस समय वे मीकू की मम्मी को बंधा रखते और जब मीकू की मम्मी को खुला छोड़ते हैं तो .... - इतना कह कर केओ मोर ने अपना वाक्य अधूरा छोड़ दिया।
‘आजादी चाहिए उन्हें आजादी’ - फट सा पड़ा था मीकू।
मीकू भावुक होते हुए आगे कहने लगा - ‘मैंने अपनी माँ को रोते हुए देखा है। वे कहतीं हैं हमें भी जंगल में अपनी मर्जी से अपने परिवार के साथ घूमने का हक मिलना चाहिए।’
राजू ने कहा- मीकू की बात सुनकर और कोई बोलता इससे पहले मिट्ठू ने कहा -‘जीवन में सब कुछ सबको नहीं मिलता, मीकू तुम्हें तो गर्व होना चाहिए कि तुम्हारे मम्मी पापा कितना अच्छा काम कर रहे हैं। वे इंसानों की मदद कर रहे हैं और साथ ही साथ हमारे साथी बंदरों द्वारा उनके बाग को उजाड़े जाने के हम लोगों के कलंक को भी धो रहे हैं।’
‘उजड़े तहस-नहस हुए बाग में तो हमारा भी नाचने का मन नहीं होता, मैं भी तुम्हारे मम्मी पापा का शुक्रगुजार हूँ मीकू।’ - केओ मोर ने भी मीकू को समझाते हुए कहा।
इस पर मैंने कहा - ‘इस तरह किसी को भी बंधन में रखना ठीक नहीं है। हम इंसानों की दुनिया में तो इसके खिलाफ कानून बने हैं। मैं एक पशु पक्षियों की रक्षा करने वाले स्वयंसेवी संगठन का पता जानता हूँ, यहाँ से जाकर मैं उन्हें सूचित करूँगा और इस विषय में कार्यवाही कर मीकू के पापा मम्मी को आजाद करवाऊँगा।’
‘हुर्रे’ क्या सचमुच ऐसा हो सकता है’? - मीकू ने खुशी से उछलते हुए कहा।
हाँ,हाँ, क्यों नहीं, राजू सचमुच ऐसा कर सकता है।’ -तभी मिट्ठू ने मेरा पक्ष लेते हुए कहा।
‘अगर ऐसा हुआ तो मैं वादा करता हूँ, कि अपने मम्मी पापा के साथ मैं खुद मोर्चे पर डटूँगा और मौसम आने पर एक भी बंदर को इस या ऐसे किसी बाग के पास तक नहीं फटकने दूँगा।’
‘इस तरह तो सबका काम बन जाएगा।’-वहीं फूल पर बैठी एक नन्ही पीले रंग की तितली ने अपनी महीन और प्यारी आवाज में जब यह कहा तो सब खुशी से झूम उठे।’
अभी मैं उनसे यह प्रश्न पूछने ही जा रहा था कि वे सब इंसानों की भाषा में कैसे बात कर रहे हैं। अचानक मुझे एक आवाज सुनाई पड़ी -‘राजू,... राजू,... सोते ही रहोगे, स्कूल नहीं जाना है आज क्या ? अरे यह तो मेरी मम्मी की आवाज है।
वे मुझे उठा रहीं थीं। तब मुझे लगा अरे मैं तो एक सपना देख रहा था।
‘हत्तेरे की...’- कमल बुरा सा मुँह बनाकर बोला।
‘लेकिन अधूरा होते हुए भी ये सपना पूरा था।’-नंदू ने कहा।
‘राजू के इस सपने को हम सब दोस्त मिलकर पूरा करेंगे। आओ आज से संकल्प लें कि किसी जानवर या पक्षी को नहीं सताएंगे।’ -स्टेला ने कहा।
‘और जो ऐसा करेगा उसका विरोध करेंगें’- विक्टर ने कहा।
‘किसी को इन बेजुबानों पर अत्याचार भी नहीं करने दंेगे।’- कहते हुए जब राजू ने अपना हाथ आगे बढ़ाया तो सबने उस हाथ पर अपना हाथ रख दिया।
राजू ने देखा उसके सभी दोस्तों की आँखों में दृढ़निश्चय की चमक थी।


 

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