मातृ भाषा कनउजी में
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फैली बीमारी,है बुखार सब
असपताल भर डारे हैं,
जे आस पास के हाल देख,
अब काँपत प्रान हमारे हैं,
घुटना हड्डी सब जोड़ दुखैं,
नाहीं कछु दिखत सहारे हैं,
हमहूँ कहुँ गौतर खाय आंय,
मन मैं अब जहे हमारे है,
असपताल भर डारे हैं,
जे आस पास के हाल देख,
अब काँपत प्रान हमारे हैं,
घुटना हड्डी सब जोड़ दुखैं,
नाहीं कछु दिखत सहारे हैं,
हमहूँ कहुँ गौतर खाय आंय,
मन मैं अब जहे हमारे है,
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