रखो कदम तुम ऐसे जो,
पैरों से पदचाप न हो,
पहले सोचो फिर बोलो,
कहके फिर संताप न हो,
पैरों से पदचाप न हो,
पहले सोचो फिर बोलो,
कहके फिर संताप न हो,
मन वाणी और कर्म सभी,
निर्मल कर लो कुछ ऐसे,
जो व्यवहार करो जग से,
उसमें कोई पाप न हो,
निर्मल कर लो कुछ ऐसे,
जो व्यवहार करो जग से,
उसमें कोई पाप न हो,
लगता मुझसे बड़ा कोई,
साथ चले मेरे साया,
सोच रहा तो लगता है,
वो खुद अपना आप न हो,
साथ चले मेरे साया,
सोच रहा तो लगता है,
वो खुद अपना आप न हो,
रेत औ पानी पर लिक्खे,
नाम सभी मिट जाएंगे,
काम ही क्या जिनकी,
मन की चट्टानों पर छाप न हो,
नाम सभी मिट जाएंगे,
काम ही क्या जिनकी,
मन की चट्टानों पर छाप न हो,
सब सोते मैं जगता हूँ,
पता नहीं क्या बकता हूँ,
मैं समझा वरदान जिसे,
पता नहीं अभिशाप न हो,
पता नहीं क्या बकता हूँ,
मैं समझा वरदान जिसे,
पता नहीं अभिशाप न हो,
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