कुदरत के सब रंग निराले,
गोरे हों या काले,
मन कहता तू मन के अंदर,
सारे रंग समा ले,
पत्ती हरी, पंख तितली के,
लाल श्वेत या काले,
देखे अगर दुखी मन,
फैलें अंदर गहन उजाले,
गोरे हों या काले,
मन कहता तू मन के अंदर,
सारे रंग समा ले,
पत्ती हरी, पंख तितली के,
लाल श्वेत या काले,
देखे अगर दुखी मन,
फैलें अंदर गहन उजाले,
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