"चलाचल पथिक तू लहर के सहारे,
पहुँच जाएगा एक दिन उस किनारे,
पहुँच जाएगा एक दिन उस किनारे,
लहर ये तेरे मन की ही तो लहर है,
चले एक पल या कि पहरों पहर है,
ये मन की लहर तुझको रुकने न देगी,
चलेगा तेरी राह, रौशन करेगी,
चले एक पल या कि पहरों पहर है,
ये मन की लहर तुझको रुकने न देगी,
चलेगा तेरी राह, रौशन करेगी,
तू चल तो,बिना कुछ भी सोचे विचारे,
पहुँच जाएगा एक दिन उस किनारे,
पहुँच जाएगा एक दिन उस किनारे,
विफलता कहेगी, अभी तू है कच्चा,
अगर दिल में होगा,तेरा प्यार सच्चा,
न ठोकर लगेगी न खाएगा गच्चा,
मगर मान फिर भी अभी तो है बच्चा,
अगर दिल में होगा,तेरा प्यार सच्चा,
न ठोकर लगेगी न खाएगा गच्चा,
मगर मान फिर भी अभी तो है बच्चा,
तेरे साथ चलता,परम वो पिता रे,
पहुँच जाएगा एक दिन उस किनारे,
पहुँच जाएगा एक दिन उस किनारे,
न दुनिया न दौलत न साथी मिलेगा,
ये वो राह, जिस पर अकेला चलेगा,
न रखना कोई मोह रिश्ता न नाता,
तू खुद का है साथी ये क्यों भूल जाता,
ये वो राह, जिस पर अकेला चलेगा,
न रखना कोई मोह रिश्ता न नाता,
तू खुद का है साथी ये क्यों भूल जाता,
सफर तो है लंबा मगर डर न प्यारे,
पहुँच जाएगा एक दिन उस किनारे,
पहुँच जाएगा एक दिन उस किनारे,
नहीं पाएगा मुक्ति खुद के बिना रे,
पहुँच जाएगा एक दिन उस किनारे,
पहुँच जाएगा एक दिन उस किनारे,
चलाचल पथिक तू...
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