Thursday, 15 September 2016

आओ हम जन मन गण गाएँ,
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आओ हम जन मन गण गाएँ,
लोकतंत्र का जश्न मनाएँ,
संत मौलवी दुष्कर्मी हैं,
प्रवचन सुनने किससे जाएँ,
आओ हम जन मन गण गाएँ,
लोकतंत्र का जश्न मनाएँ,
भक्षक फिरें निरंकुश, डोलें,
रक्षक पिटते, जान बचाएँ,
आओ हम जन मन गण गाएँ,
लोकतंत्र का जश्न मनाएँ,
अपराधी जब जन नेता हों,
न्याय भला फिर किससे पाएँ,
आओ हम जन मन गण गाए,
लोकतंत्र का जश्न मनाएँ,
सीमाएँ हर रोज सिमटतीं,
खबर पढ़ें,अफसोस जताएँ,
आओ हम जन मन गण गाएँ,
लोकतंत्र का जश्न मनाएँ,
शब्द पढ़ें, बस संविधान में,
अर्थ कहाँ हैं, ढ़ूँढ़ न पाएँ,
पाँव कुल्हाड़ी मार के अपने,
अब हम किसको व्यथा सुनाएँ,
आओ हम जन मन गण गाएँ,
लोकतंत्र का जश्न मनाएँ,

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