समय की नदी तो,बही जा रही है,
तेरी आरजू सब,रही जा रही है,
तेरी आरजू सब,रही जा रही है,
ठहर तो कुछ एक पल,ज़रा सोच ले तू,
मुखौटे जो पहने, उन्हें नोच ले तू,
मुखौटे जो पहने, उन्हें नोच ले तू,
क्या आया था करने,क्या करने लगा है,
पता है हर एक पल तू, मरने लगा है,
पता है हर एक पल तू, मरने लगा है,
गलत राह है या, सही जा रही है,
तेरी आरजू सब, रही जा रही है,
तेरी आरजू सब, रही जा रही है,
बहुत पुण्य तेरे, तू ऐसा बना है,
जरा आईना देख, कैसा बना है ?
जरा आईना देख, कैसा बना है ?
नहीं ऐसा अवसर, दोबारा मिलेगा,
न जाने कमल ऐसा, फिर कब खिलेगा ?
न जाने कमल ऐसा, फिर कब खिलेगा ?
कथा ये चिरंतन, कही जा रही है,
तेरी आरजू सब, रही जा रही है,
तेरी आरजू सब, रही जा रही है,
चले जा रहे हैं,ये साँझ और सवेरे,
ये सूरज ये चंदा, न तेरे न मेरे,
ये सूरज ये चंदा, न तेरे न मेरे,
भले पास आएं, न तेरे उजाले,
कोई मन से मीठी सी, धुन गुनगुना ले,
कोई मन से मीठी सी, धुन गुनगुना ले,
ये नईया किधर भी, नहीं जा रही है,
तेरी आरजू सब, रही जा रही है,
तेरी आरजू सब, रही जा रही है,
समय की नदी तो...
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