Thursday, 15 September 2016

लहर की मानिन्द चुप - चुप,
बह रही है चाँदनी,
ग़र सुने कुछ -कुछ यक़ीनन ,
कह रही है चाँदनी,
रात आई, छोड़ कर सब,
चल दिए तनहा उसेे,
बेवफाई का सितम यूँ ,
सह रही है चाँदनी,

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