Thursday, 15 September 2016

आज कल देखा गया है अपनी व्यस्तताओं के चलते पिता का उनके बच्चों चाहे वह लड़का हो या लड़की उससे अबोला सा रहता है। यह एक अलग तरह की चुनौती है।
प्रस्तुत है एक कविता

पापा पास बुलाओ ना,
रूठूँ, मुझे मनाओ ना,
कुछ माँगूँ तो मत बोलो,
मम्मी से ले आओ ना,
याद करो अपना बचपन,
छोटे थे कैसा था मन,
बात करो मेरे मन की,
कुछ घर की कुछ ट्यूशन की,
अपने गले लगाओ ना,
अब इतना झुँझलाओ ना,
अभी तो आए,जाओ ना,
पापा पास बुलाओ ना,

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