...जिनके ज़ुल्म से दुखी है जनता हर बस्ती हर गाँव में,
दया-धर्म की बात करें वह बैठ के सजी सभाओं में,
दान का चर्चा घर-घर पहुँचे,लूट की दौलत छुपी रहे,
नकली चेहरा सामने आए, असली सूरत छिपी रहे,
देखें इन नकली चेहरों की कब तक जय-जयकार चले,
उजले कपड़ों की तह में, कब तक काला बाज़ार चले,
कब तक लोगों की नज़़रों से,छिपी हक़ीकत छिपी रहे,
नक़ली चेहरा सामने आए, असली सूरत छिपी रहे, (साहिर)
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