अय दिल बता तू इतना परेशान सा क्यों है,
हर सिम्त जहाँ में भरा आलाम सा क्यों है,
जीता न कोई जीत के बाजी यहाँ फिर भी,
दुनियाँ का ये धनवान इक शैतान सा क्यों है,
है खेल जमाने से चला आया एक ही,
पर देख इसे शख्स हर हैरान सा क्यों है,
है दर्द बिना गीत की,जाने इसे दुनियाँ,
ताहम कोई गालिब कोई खैयाम सा क्यों है,
चाहा था जहाँ से वही पाया हसीं तोहफा,
जीवन मेरा मुझपे मगर इल्ज़ाम सा क्यों है,
रोका न था मैंने न ही शिकवा ही किया था,
क़ातिल मेरा मक़्तल में मेहरवान सा क्यों है,
माना कि जिन्दगी है खुशी ग़म की कहानी,
हर चीख बेकसों की, इक पैगाम सा क्यों है,
ऊपर से तो हर दिल यहाँ खुश दिखता है मगर,
हर साँस में, इक दर्द का तूफान सा क्यों है,
ये मुझको पता है, कि है हर चीज पुरानी,
लेकिन नया कुछ करने का,अरमान सा क्यों है,
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