Tuesday, 14 May 2013

सूरज जैसी कभी न रुकतीं,
चींटी जैसी कभी न थकतीं,
गुस्से में भी प्यार ही होता,
अगर कभी तुम बकती झकती,
लगी सदा ही रहतीं हरदम,
सर्दी वर्षा हो या धाम,मम्मी आज करो आराम,

टिंकू पोंछा लगवाएगा,
रिन्की चाय बना लाएगी,
अभी देखना जरा देर में,
बढ़िया सब्जी बन जाएगी,
तुम बस बैठे-बैठे देखो,
झटपट कैसे होते काम, मम्मी आज करो आराम,

चाहो तो टी.वी. ही खोलो,
या फिर आँटी के घर हो लो,,
सुबह रोज जल्दी उठ जाती,
अच्छा है दिन में कुछ सो लो,
अपनी पॉकेट में पैसे हैं,
लेंगे नहीं कोई हम दाम,मम्मी आज करो आराम,

कितना ध्यान हमारा रहता,
इसे देख मेरा मन कहता,
कभी न रुकने वाला झरना,
मम्मी की ममता का बहता,
नहीं दे सकेंगे हम बदला,
काम करें चाहे आठों याम,मम्मी आज करो आराम...

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