किसके पैसे (19)
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सबकी जेबों में रहते हो,
हो आखिर तुम किसके पैसे,
आम संतरे टॉफी खाते,
वो होते हैं जिसके पैसे,
बोले दादाजी गौरव से,
जेब से मेरी खिसके पैसे,
गौरव हँस कहता दादा से
,पास में जिसके उसके पैसे,
दादाजी ने फिर समझाया,
गौरव बेटा ऐसा कैसे,
चीज के बदले चीज मिले या
मेहनत की है कीमत पैसे,
पहले मीठी सी पप्पी दो,
फिर जेबों में रक्खो पैसे,
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सबकी जेबों में रहते हो,
हो आखिर तुम किसके पैसे,
आम संतरे टॉफी खाते,
वो होते हैं जिसके पैसे,
बोले दादाजी गौरव से,
जेब से मेरी खिसके पैसे,
गौरव हँस कहता दादा से
,पास में जिसके उसके पैसे,
दादाजी ने फिर समझाया,
गौरव बेटा ऐसा कैसे,
चीज के बदले चीज मिले या
मेहनत की है कीमत पैसे,
पहले मीठी सी पप्पी दो,
फिर जेबों में रक्खो पैसे,
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