मत बनना तुम बोझ किसी पर (22)
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चाहे वह पृथ्वी माता हो,
चाहे वह जननी माता हो,
वृक्ष लगा कर हरा बनाना,
फर्ज़ अदा कर सेवा करना,
जब तक रहना इस धरती पर,
मत बनना तुम बोझ किसी पर,
राहों में बाधा आती हैं,
लगन देख कर हट जाती हैं,
जैसे तेज पवन झोंकों से,
झुकी बदलियाँ छँट जाती हैं,
बढ़ें कदम हर एक खुशी पर,
मत बनना तुम बोझ किसी पर,
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चाहे वह पृथ्वी माता हो,
चाहे वह जननी माता हो,
वृक्ष लगा कर हरा बनाना,
फर्ज़ अदा कर सेवा करना,
जब तक रहना इस धरती पर,
मत बनना तुम बोझ किसी पर,
राहों में बाधा आती हैं,
लगन देख कर हट जाती हैं,
जैसे तेज पवन झोंकों से,
झुकी बदलियाँ छँट जाती हैं,
बढ़ें कदम हर एक खुशी पर,
मत बनना तुम बोझ किसी पर,
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