Friday, 3 May 2013

 चींटी तेरी शाम नहीं       (26)
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टर्र-टर्र मेंढक टर्राते,
क्या इनको कुछ काम नहीं,

रात-रात भर झन-झन करते,
झींगुर को आराम नहीं,

रोज सुबह सूरज दादा,
उठ चल पड़ते,विश्राम नहीं,

हर पल चलते ही देखा है,
 चींटी तेरी शाम नहीं,

चक्र समय का चलता रहता,
करता कहीं मुकाम नहीं,

हरदम आगे ही बढ़ता है,
पल भर भी आराम नहीं,

हर जीवन्त प्राण में गति लय,
तुझ पर हो इल्ज़ाम नहीं,

चलना ही जीवन का मक़सद,
रुकना तेरी शान नहीं,

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