फूल जब अपनी छाती खोलते हैं,
सुन्दरता सुगन्धि मकरंद की समृद्धि आती है,
सीपियाँ जब अपनी छाती खोलतीं हैं,
मोती झपट पड़ते हैं,
हनुमान जब अपनी छाती खोलते हैं,
सीताराम का चित्र,
रात जब अपनी छाती खोलती है,
कोटि-कोटि नक्षत्र,
सबके ह्रदय में एक न एक,
निधि निधान-
तुम्हारा वर प्रदान है,
मेरे ह्रदय में,
तुम तो रहो,
स्वतंत्रधीर सिद्धेश्वरा.....(संकलित)
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