सभी सिमटते जाते खुद में, मौसम सर्द हुआ,
दिल के जख्मों में नया, एक शामिल दर्द हुआ,
अपने-अपने तने चँदोवे, हैं लिबास अपने-अपने,
आज ओढ़ते हैं यूँ जैसे, भूल गए कल के सपने,
करके ऋतु का तिरस्कार, जो कल खोए थे खुद में,
देख रहा हूँ आज यहाँ, रुख उनका जर्द हुआ,
जुबाँ खुली है मुक्त हाथ, अहसासों पर ना पहरा,
रुके हुए पानी के जैसा एक जगह क्यों ठहरा,
कर ले पूरा वो जो तूने देखा ख्वाब सुनहरा,
भूल वक्त को जो बैठा,राहों की गर्द हुआ..
दिल के जख्मों में नया, एक शामिल दर्द हुआ,
अपने-अपने तने चँदोवे, हैं लिबास अपने-अपने,
आज ओढ़ते हैं यूँ जैसे, भूल गए कल के सपने,
करके ऋतु का तिरस्कार, जो कल खोए थे खुद में,
देख रहा हूँ आज यहाँ, रुख उनका जर्द हुआ,
जुबाँ खुली है मुक्त हाथ, अहसासों पर ना पहरा,
रुके हुए पानी के जैसा एक जगह क्यों ठहरा,
कर ले पूरा वो जो तूने देखा ख्वाब सुनहरा,
भूल वक्त को जो बैठा,राहों की गर्द हुआ..
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