Thursday, 9 May 2013

कभी कभी रोना भी अच्छा     (21)  
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छोड़ो मुन्नी रोना-धोना, तुम हमसे ये बात कहो ना,
रसगुल्ला है गोल,समोसा होता है क्यों भला तिकोना

अच्छा मुन्नी जरा बताओ,रोने पर क्यों आँसू आते,
काँटों भरी झाड़ियों में भी, फूल भला क्यों हैं मुस्काते,

जरा हमें ये तो समझाओ,क्यों है आम फलों का राजा,
शुद्ध रक्त करने को, कहते क्यों हैं कड़वी नीम चबा जा,

हँसना है व्यायाम अनोखा,स्वास्थ सदा हो इससे अच्छा,
मन का मैल निकल जाता है,कभी कभी रोना भी अच्छा,

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