कल का हिन्दुस्तान.........
Thursday, 30 May 2013
होती है जब जमा,मन में पीड़ा अधिक,
कंठ से खुद-ब-खुद गीत-गंगा बही,
कौन परिचित नहीं निर्झरी शक्ति से,
तोड़ जो पत्थरों का कलेजा रही,
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